समर्ण करो उस वक़्त को जब देश अपना
गुलाम था,
कितने क्रांतिकारियों ने था अस्त्र उठाया जब अंग्रेजों का कत्लेआम था ।
उन देशभक्तो में एक मोहनदास भी अपना आम था ,
सत्य अहिंसा का पथ था जिसका वह बापू अपना महान था।
असहयोग आंदोलन का दीप जलाकर जिसने आजादी का बेणा उठाया था ,
वह व्यक्ति ही दुखी हो गया जब सिरफिरो ने हथियार उठाया था ।
जब अंग्रेजों ने चौरी चौरा बाज़ारो के दाम को उछाला था ,
तब कईयों ने आंदोलन कर पुलिस के जुल्म को झेला था ।
आंदोलन बढने पर जब मुख्य नेताओं को पुलिस ने जेल मे डाला था ,
तब सिरफिरों ने थाना खेर कर अंग्रेजों को उसी में फूक डाला था ।
सिरफिरा के लिए यह कांड जीत का प्रतीक था ,
पर गाँधी जी के लिए यह कांड हार का प्रतीक था ।
यह दृश्य ना तो जीत ना तो हार का प्रतीक था ,
यह दृश्य भारत पे लगे काले दाग का प्रतीक था ।
यह दृश्य भारत पे लगे काले दाग का प्रतीक था ।