समर्ण करो उस वक़्त को जब देश अपना गुलाम था, कितने क्रांतिकारियों ने था अस्त्र उठाया जब अंग्रेजों का कत्लेआम था। उन देशभक्तो में एक मोहनदास भी अपना आम था , सत्य अहिंसा का पथ था जिसका वह बापू अपना महान था। असहयोग आंदोलन का दीप जलाकर जिसने आजादी का बेणा उठाया था , वह व्यक्ति ही दुखी हो गया जब सिरफिरो ने हथियार उठाया था । जब अंग्रेजों ने चौरी चौरा बाज़ारो के दाम को उछाला था , तब कईयों ने आंदोलन कर पुलिस के जुल्म को झेला था । आंदोलन बढने पर जब मुख्य नेताओं को पुलिस ने जेल मे डाला था , तब सिरफिरों ने थाना खेर कर अंग्रेजों को उसी में फूक डाला था । सिरफिरा के लिए यह कांड जीत का प्रतीक था , पर गाँधी जी के लिए यह कांड हार का प्रतीक था । यह दृश्य ना तो जीत ना तो हार का प्रतीक था , यह दृश्य भारत पे लगे काले दाग का प्रतीक था । यह दृश्य भारत पे लगे काले दाग का प्रतीक था ।